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शनिवार, 20 अक्तूबर 2012

आधे अधूरे ..( 2)

 
1.
वो ख्वाहिशें तमाम
  अपनी  ही थी
जो खाक कर गई
 हमें पूरी होने से पहले ..

2.
कितनी फितरतों ने साथ छोड़ा
लम्हों ने हर मोड़ पर मुंह मोड़ा
अब तो हर गाँठ   नजर आती है
की कितनी बार हमने खुद को जोड़ा ...

3.
ये लिखे शब्द वही जुबां है 
जो तुझे देखकर चुप हो जाती है ...!!

सोमवार, 8 अक्तूबर 2012

अपर्णा

मेरी शाख  मुझसे
कहती है
क्या मेरा वजूद तुझसे है??
यदि हाँ .. तो
रंग क्यूँ है फीका ...


मेरी जड़े टिकाये मुझे
अदृश्य रह कर भी
संभाले  अलसाए
अस्तित्व को ....

और मैं
मुझसे ना शाख को
समझाया जा सका
ना जड़ें फैलाई
जा सकी ...