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मंगलवार, 28 जनवरी 2014

ये न पूछो...

कतरा जो थमा था निकलते -निकलते
चुभता है कितना ये ना पूछो

बेतरतीबी मेरी..मेरे लहजे से बयाँ होती है
है किरदार मेरा क्या ..ये ना पूछो

मेरी वफाये तेरे वजूद में कैद हैं
हैं इश्क कैसा मेरा??..ये ना पूछो

तेरा अक्स मेरे जर्रे जर्रे में बिखरा
है आईना कैसा मेरा ...ये ना पूछो

सोमवार, 20 जनवरी 2014

मन

कुछ शब्दों
की सुगबुगाहट
पूछ लेती है
कभी कभी
"ये तू है"..??
मन अल्हड सा
बिना शर्त
स्वीकारता
"हाँ..ये मैं ही हूँ "..!!ै