शब्द ने शब्द जोड़े.. शब्द से शब्द बिखरे.. शब्द -शब्द ने ढूंढें अक्षर.. शब्द- शब्द फिर, शब्दश: खामोश हुए..!
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सोमवार, 19 नवंबर 2012
शनिवार, 20 अक्टूबर 2012
आधे अधूरे ..( 2)
1.
वो ख्वाहिशें तमाम
अपनी ही थी
जो खाक कर गई
हमें पूरी होने से पहले ..
2.
कितनी फितरतों ने साथ छोड़ा
लम्हों ने हर मोड़ पर मुंह मोड़ा
अब तो हर गाँठ नजर आती है
की कितनी बार हमने खुद को जोड़ा ...
3.
ये लिखे शब्द वही जुबां है
जो तुझे देखकर चुप हो जाती है ...!!
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