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सोमवार, 8 अक्तूबर 2012

अपर्णा

मेरी शाख  मुझसे
कहती है
क्या मेरा वजूद तुझसे है??
यदि हाँ .. तो
रंग क्यूँ है फीका ...


मेरी जड़े टिकाये मुझे
अदृश्य रह कर भी
संभाले  अलसाए
अस्तित्व को ....

और मैं
मुझसे ना शाख को
समझाया जा सका
ना जड़ें फैलाई
जा सकी ... 

16 टिप्‍पणियां:

  1. मेरी जड़े टिकाये मुझे
    अदृश्य रह कर भी
    संभाले अलसाए
    अस्तित्व को ....

    बहुत गहन और उत्कृष्ट अभिव्यक्ति ...आशा जी ...!!

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  2. मेरी शाख मुझसे
    कहती है
    क्या मेरा वजूद तुझसे है??
    यदि हाँ .. तो
    रंग क्यूँ है फीका ...

    बहुत सुंदर और गंभीर सवाल लिये हुए कविता पसंद आई.

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  3. बहुत बदिया और उत्कृष्ट अभिव्यक्ति ...रचना अच्छी लगी,,,

    RECENT POST: तेरी फितरत के लोग,

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  4. आपकी इस उत्कृष्ट प्रस्तुति की चर्चा कल मंगलवार ९/१०/१२ को चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा चर्चामंच पर की जायेगी

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  5. और मैं
    मुझसे ना शाख को
    समझाया जा सका
    ना जड़ें फैलाई
    जा सकी ... अदभुत अभिव्यक्ति

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  6. बहुत सुन्दर और गहन प्रस्तुति..

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  7. जीवन के द्वंद्व को बेहतर शब्द दिए हैं ......जीवन एक अबूझ पहेली है शाख या जड़ ....लेकिन यह तो सच है कि जड़ के बिना किसी शाख का अस्तित्व नहीं होता .....!

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  8. मेरी शाख मुझसे
    कहती है
    क्या मेरा वजूद तुझसे है??
    यदि हाँ .. तो
    रंग क्यूँ है फीका ...
    गहन भाव लिए बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  9. सुन्दर गहन भावमय अभिव्यक्ति.
    आभार,आशा जी

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  10. मेरी शाख मुझसे
    कहती है
    क्या मेरा वजूद तुझसे है??
    यदि हाँ .. तो
    रंग क्यूँ है फीका ...बहुत सुंदर और गंभीर सवाल सवाल करती रचना.......

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  11. जीवन - द्वंद्व को बखूबी शब्दों में ढाला है आपने ...यही तो जिंदगी है कितना कुछ न कर पाने के कसक रह ही जाती हैं ...बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  12. ये अन्दर कितना कुछ चलता है...:)

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