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मंगलवार, 28 जनवरी 2014

ये न पूछो...

कतरा जो थमा था निकलते -निकलते
चुभता है कितना ये ना पूछो

बेतरतीबी मेरी..मेरे लहजे से बयाँ होती है
है किरदार मेरा क्या ..ये ना पूछो

मेरी वफाये तेरे वजूद में कैद हैं
हैं इश्क कैसा मेरा??..ये ना पूछो

तेरा अक्स मेरे जर्रे जर्रे में बिखरा
है आईना कैसा मेरा ...ये ना पूछो

13 टिप्‍पणियां:

  1. तेरा अक्स मेरे जर्रे जर्रे में बिखरा....बहुत खूबसूरत भाव ...!!

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  2. तेरा अक्स मेरे जर्रे जर्रे में बिखरा
    है आईना कैसा मेरा ...ये ना पूछो
    ....वाह...बहुत सुन्दर...

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  3. बहुत सुन्दर रचना...
    http://mauryareena.blogspot.in/
    :-)

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  4. काफी उम्दा रचना....बधाई...
    नयी रचना
    "सफर"
    आभार

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  5. तेरा अक्स मेरे जर्रे जर्रे में बिखरा

    bahut khoob ....!!

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  6. तेरा अक्स मेरे जर्रे जर्रे में बिखरा
    है आईना कैसा मेरा ...ये ना पूछो ..
    बहुत खूब .. उनका अक्स जर्रे जर्रे मेंताभी बिखरता है जब प्रेम ऊंचे शिखर को छूता है ...
    लाजवाब भावाव्यक्ति ...

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  7. बहुत खूबसूरत अल्फाज़ हैं ..... कुछ यूँ कहते तो और भी बेहतर लगता :-

    कतरा थमा था जो निकलते हुए
    चुभता है कितना, ये ना पूछो

    बेतरतीबी लहजे से बयाँ होती है
    है किरदार मेरा क्या, ये ना पूछो,

    मेरी वफाये तेरे वजूद में कैद हैं
    हैं इश्क मेरा कैसा, ये ना पूछो,

    तेरा अक्स मेरे जर्रे-जर्रे में बिखरा
    है आईना मेरा कैसा, ये ना पूछो,

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  8. तेरा अक्स मेरे जर्रे जर्रे में बिखरा
    है आईना कैसा मेरा ...ये ना पूछो

    सुंदर भाव और सुंदर शब्दों से सजी रचना है …
    बहुत खूबसूरत !

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  9. बेहद शानदार रचना ....बहुत खूब आशा जी मज़ा आ गया आज इसे पढ़कर...


    शुभकामनाओ के साथ
    संजय भास्कर

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