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शुक्रवार, 11 अप्रैल 2014

कुछ पन्ने...

खूबसूरत हैं जिन्दगी
बिलकुल मेरी डायरी सी

शुरूआती  पन्ने
बहुत सुन्दर
तमाम रंग..मेरे हाथों से
तो कुछ बड़ो के सहारों से

फिर
ओह्ह...बेहतरीन चटक रंग
लाल गुलाबी पीले नीले
पर सब एक साथ
शायद ज्यादा हो लिए
वरना काले नही पड़ते...

बाद के कुछ पन्ने
कटे फटे ..
मुड़े भी
उफ़ कुछ तो स्याह
एकदम सख्त ..

ये क्या...??
ये पन्ने फिर खाली
एकदम कोरे
ऐसा क्यूँ???
मैं कहाँ थी???

और कुछ पन्ने
तेरे लिए छोड़े हैं
काश कोई कह दे
कि लिख दो
या लिख दूँ??
कुछ पारदर्शी रंगों
तेरा नाम फिर से ....!!!े

15 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना रविवार 13 अप्रेल 2014 को लिंक की जाएगी...............
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  2. बहुत ही लाजवाब भाव, शुभकामनाएं.

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  3. सही कहा जीवन ऐसे ही एक डायरी की तरह है कहीं खुशनुमा तो कहीं बदनुमा

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  4. जिंदगी कि डायरी के कुछ पन्ने खुद भी भरने चाहियें ... कुछ अपने आप भर जाते हैं किसी के प्रेम से ...

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  5. कोरे रह गए पन्नों को यों न छोड़िये ,डायरी आपकी भरनी भी आपको ही....!

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  6. वाह , प्रभाव छोडती रचना ! बधाई

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  7. कभी गर्दिशों से दोस्ती कभी गम से याराना हुआ
    चार पल की जिन्दगी का ऐसे कट जाना हुआ

    बहुत अद्भुत अहसास...सुन्दर प्रस्तुति .पोस्ट दिल को छू गयी.......

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  8. antarman ki lahron ko shaant karne ke liye....shabdo ki abhivyakti behtareen hai.......ati sundar..

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