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शुक्रवार, 9 दिसंबर 2016

बात

उफान ,तिलिस्म,
जिद ,अहम
सब अनवरत
फिर
धुआ ....!

मौन , बातें
हंसी ,आँसू
सब मुझसा
फिर
खत्म....!!

सांसे,सन्नाटा
शोर, खामोशी
सब तुझसा
फिर
दर्द ....!!!!

1 टिप्पणी:

  1. दर्द तो कभी ख़त्म नहीं होता ... सब में साथ ही रहता है ... सतत ...

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