शब्द ने शब्द जोड़े.. शब्द से शब्द बिखरे.. शब्द -शब्द ने ढूंढें अक्षर.. शब्द- शब्द फिर, शब्दश: खामोश हुए..!
कुछ सांचे कुछ आकृति कुछ यादें दरवाजों पर लगी सांकल सी ..!
शुभ वर्ष
हाशिये छोड़ ..कतार के आखिर में मै शोर और संवाद दोनों खत्म मुझतक
हर ओर भीड़..उससे निकलती हंसी छनी छनी सिर्फ गुनगुनी मुस्कान मुझतक
बेशक आधे अधूरे हैं पर ...कभी तो कैसे तो पहुंचे शब्द मेरे तुझ तक ...!!ं