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सोमवार, 17 अक्तूबर 2011

VYATHA.......05january2003

 नम आँखों से कोई आगे दिखा 
तो कोई पीछे थामे हुए उसे 
पुकारने को विवश कर दे 
विवशता में दबती हुई
भावनाओं में घुटती हुई..


हर किसी को एक ही मुस्कान से 
अपना परिचय देती हुई 
बस ख़ामोशी से सहती रही 
वो पीड़ा, वो दर्द 
जो किसी को विवश कर दे 
रोने को, चीखने को,चिल्लाने को....
हर तरफ से बंधे-बंधे 
कुछ पर्वतों से घिरे उस  राह पर
जाने के लिए वो तैयार थी
पर तैयार न थे
उसके साथी,समय, हालत.... 

बस दबी जुबान से 
चुनौती देने को तैयार थी 
और समय अपनी रफ़्तार का
एक हिस्सा भी उसे न दे सका.....

मैं क्या दू उसे ,मैं स्वयं व्यस्त हूँ
जीने में अपनी परिस्थियाँ संभालने में
तुम थोडा वक्त निकालो 
साथ दो उसका
तभी जान पाओगे उसकी व्यथा....      

13 टिप्‍पणियां:

  1. ओह! अनुपम है आपकी भावपूर्ण प्रस्तुति.
    पहली दफा आपके ब्लॉग पर आया हूँ.
    आपकी काव्य प्रतिभा मन मोहती है.

    सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.
    मेरे ब्लॉग पर आप आयीं ,इसके लिए भी आपका आभार.

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  2. सुंदर भावाभिव्यक्ति है आशा जी।
    अच्छा लगा आपको पढ कर - आभार

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  3. भावनाओं को बहुत सशक्त तरीके से अभिव्यक्त किया है आपने ...अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर
    आपकी रचनात्मकता सशक्त है .. आशा है आप अपने सशक्त लेखन से ब्लॉग जगत को समृद्ध करेंगे ....शुभकामनायें आशा जी ..!

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  4. @rakesh kumar ji bahut danyvaad. mera mano bal badane ke liye.

    @lalit sharma ji.apke comment ne mera utsaah aaur adhik badya hai

    @kewal ram ji apka comment mere liye abhjprerna saman hai..aage bhi apke margdarshan ki echchhuk rahungi....

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  5. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति| धन्यवाद|

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  6. इस भावपूर्ण रचना के लिए बधाई स्वीकारें

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  7. गहन शब्दों का चयन ..गहन भावाभिव्यक्ति ..अच्छी रचना ...

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  8. yahi duvidha hai k aaj waqt kisi k paas nahi hai. pal bhar ko sath chalne ko hath sabhi pakad lete hain lekin nibhata koi nahi.

    sunder rachna.

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  9. अच्छी प्रस्तुति सुंदर रचना,बढिया प्रयास...बधाई

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  10. व्यथा की कथा बहुत भावपूर्ण लिखी है /

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  11. अति सुन्दर , बधाई स्वीकारें.

    कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारें.

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  12. व्यथा....
    किस से कहें ...क्यों कहें ....?
    हार्दिक शुभकामनायें आपको !

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