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सोमवार, 28 मई 2012

मैं और मेरा ...

मैं और मेरा संसार 
अपूर्ण मेरी तरह 
किस्म-किस्म के कायदे 
तरह तरह की सीमायें 

घेरों का शोर 
टूटे तो तकलीफ 
न टूटे तो 
दम घुटता है ...

मैं और मेरा प्यार 
मेरी तरह निर्लज्ज 
पल -पल बिखरता 
क्षण-क्षण बंधता 

कह दूं तो 
फिर  तमाशा
छुपाऊ तो 
दम  तोड़ता है...!!!
 

23 टिप्‍पणियां:

  1. कह दूं तो
    फिर तमाशा
    छुपाऊ तो
    दम तोड़ता है...!!!

    प्यार कुछ ऐसा ही होता है,,,,,,,

    RECENT POST ,,,,, काव्यान्जलि ,,,,, ऐ हवा महक ले आ,,,,,

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  2. मैं और मेरा प्यार
    मेरी तरह निर्लज्ज
    पल -पल बिखरता
    क्षण-क्षण बंधता
    कह दूं तो
    फिर तमाशा
    छुपाऊ तो
    दम तोड़ता है...!!!
    gahan bhav...sundar rachana...

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  3. क्या टिप्पणी दूं।....... यहाँ तो बस कसमसाहट सी है कि मै इतनी सरस और सुन्दर रचना क्यों नहीं दे पाता हूँ। बस !!

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  4. अंतरात्मा को झकझोरते शब्द ...!

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  5. घेरों का शोर
    टूटे तो तकलीफ
    न टूटे तो
    दम घुटता है ...उत्कृष्ट अभिव्यक्ति

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  6. बेहतरीन भाव ... बहुत सुंदर रचना प्रभावशाली प्रस्तुति

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  7. एक संक्षिप्त परिचय तस्वीर ब्लॉग लिंक इमेल आईडी के साथ चाहिए , कोई संग्रह प्रकाशित हो तो संक्षिप ज़िक्र और कब से
    ब्लॉग लिख रहे इसका ज़िक्र rasprabha@gmail.com

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  8. मैं और मेरा संसार
    अपूर्ण मेरी तरह ....


    यह संभवत: सभी का सच है

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  9. मन की ऊहापोह का सुंदर वर्णन ....
    अक्सर ऐसा ही होता है ....!!
    सुंदर भाव ...!!
    शुभकामनायें...

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  10. मन मे उठने वाली कशमकश कों बाखूबी लिखा है ...

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  11. क्या खूब लिखा है आपने ...
    मानसिक उहापोह और विवशता को दर्शाती सुंदर सी कविता ...
    बधाई !!

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  12. किसी कवि की रचना देखूं !
    दर्द उभरता , दिखता है !
    प्यार, नेह दुर्लभ से लगते ,
    क्लेश हर जगह मिलता है !
    क्या शिक्षा विद्वानों को दूं ,टिप्पणियों में, रोते गीत !
    निज रचनाएं ,दर्पण मन का, दर्द समझते मेरे गीत !

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  13. बहुत बेहतरीन रचना....
    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  14. सुन्दर भावमय अभिव्यक्ति,
    मैं और मेरे की अदभुत कशमकश.

    समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर आईएगा.

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