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शनिवार, 25 अगस्त 2012

दोषी कौन ???

दोषी कौन ???
सावन है तो रूमानियत भरा ...पर इस बार ये रूमानियत कब दर्द में बदल गयी इसकी खबर ही नहीं लगी ..
कुछ तस्वीरें साझा करना चाहती हूँ ..


      क्या ये अनियमित बांध ???

मन तो डूबा ही डूबा मन को बंधने वाले केंद्र भी डूबे(धारी मंदिर )।..Add caption
 उफनती नदी गहराता ह्रदय ...Add caption
या फिर अनियंत्रित निर्माण ?Add caption
आखिर दोष किसका? Add caption
 .                                         बस रह गए ये जाते पदचिन्ह ...
ये सभी चित्र उत्तराखंड के चमोली एवं उत्तरकाशी जिले की हैं जो इस बार प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए हैं।..

7 टिप्‍पणियां:

  1. सच बहुत दुख हुआ सुन कर लेकिन चित्र देख कर और भी.

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  2. प्रकृति के साथ खिलवाड़ ,जंगलातों का विनाश, जब टूटें हैं नित पर्यावरण और पारितंत्र तब होता है ये विनाश .विनाश काले विपरीत बुद्धि कल्पना करो जब इस इलाके में भू -कम्प आये तब क्या हो ?जल की तात्विकता ,ज़मीन की तात्विकता ,उर्वरा शक्ति जब क्षीण होगी कौन रोके बांधेगा मिट्टी को जब वन माफिया घूमेगा छुट्टा ,नौचेगा पेड़ों से लीसा .तब प्रकृति करगी अट्टहास ,शिव का होगा विलास .कृपया यहाँ भी पधारे -
    ram ram bhai
    शनिवार, 25 अगस्त 2012
    काइरोप्रेक्टिक में भी है समाधान साइटिका का ,दर्दे -ए -टांग का

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  3. तस्वीरें हजार सच बोलती हैं....शब्दों की जरुरत नहीं होती....अंधाधुंध विकास कि कीमत तो हम सभी चुकाएंगे ही..कोई आज तो कोई कल..पर चुकाएंगे जरुर..अगर अब भी न चेते तो फिर प्रकृति छोड़ेगी नहीं..चैक बैलेंस तो वो करेगी ही

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  4. तस्वीरों ने सब कुछ कह दिया ... इस बर्बादी के लिए कौन जिम्मेवार है इसके लिए गहराई में सोचने की भी जरूरत है ... ...

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  5. प्रकृति अपना संतुलन स्वयं करती है ॥ मानव ही बाधा डालते हैं

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