समर्थक

बुधवार, 13 फ़रवरी 2013

मेहरबां खुदा


                                                       मेहरबां खुदा 

                                                       तकलीफ जरा कम   

                                                       हुई अबकी बार 

                                                       वरना .....

                                                       वो आये उसी  अंदाज में 

                                                       लौटे उसी अंदाज में ...!!!

16 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर प्रस्तुति आदरेया |
    शुभकामनायें-

    उत्तर देंहटाएं
  2. पृकृति का ऐसा ही नियम है, बहुत सुंदर.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  3. फिर कहाँ कम हुआ और बढ़ नहीं गई......एक बार और :-(

    उत्तर देंहटाएं
  4. वो तो नहीं बदलेंगे अपनी अदा ... खुदा ने काम किया ये अच्छा हुवा ...

    उत्तर देंहटाएं
  5. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  6. बार-बार वही पुकार, चीत्कार .... कोई रोक न कोई सुधार

    उत्तर देंहटाएं
  7. नेह की छांव में कुछ देर रुक कर
    प्रीत में मेरे भीगकर तो देखो--------
    वाह प्रेम का महीन अहसास
    सुंदर रचना
    बधाई

    http://jyoti-khare.blogspot.in/-------में
    सम्मलित हों

    उत्तर देंहटाएं
  8. लाजवाब ! सुन्दर पोस्ट लिखी आपने | पढ़ने पर आनंद की अनुभूति हुई | आभार |

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

    उत्तर देंहटाएं