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शुक्रवार, 24 मई 2013

क्यूँ

आगाज़ खामोश
अंजाम खामोश
सफ़र खामोश
साथ खामोश
फिर शोर क्यूँ???
दफ्न होने में

30 टिप्‍पणियां:

  1. छह पंक्त्यिों ने बेहतर दर्शन उकेरा है। वाकई जब इतना,ऐसे तो तब.......मौत पर ड्रामा क्‍यूं?

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  2. क्योकि पैरो के निशां बोलते हैं

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  3. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार(25-5-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

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  4. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन अरुणिमा सिन्हा को सलाम - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  5. लाजवाब अभिव्यक्ति | बहुत सुन्दर | आभार

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  6. बहुत खूब .... यह शोर बाहर का नहीं अंदर का है ।

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  7. कमाल है ...
    शुभकामनायें आपको !

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  8. अर्थपूर्ण ...
    सब कुछ खत्म हो के भी कहां खत्म होता है कुछ ...

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  9. शायद खामोशी की गूंज हो? बहुत सुंदर.

    रामराम.

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  10. शायद इसीसे ग्लानी कुछ कम हो....

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  11. बहुत खुबसूरत ..........फिल्म शोर की याद आ गई :-)

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  12. क्योंकि इस ख़ामोशी के भीतर बहुत शोर छिपा रहता है ....
    बहुत बढ़िया प्रस्तुति

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  13. ...वाह! बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...

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