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रविवार, 1 जनवरी 2012

पर.

"कुछ अनकही सुनूँ 
कह डालूं सब कुछ 
बिखेर दूं 
लम्हा-लम्हा"
पर 
कितना मुश्किल है 
फिर से ख्वाब सजाना..

भीतर उठा गुबार
थम चुका अब
जीत चुकी मैं 
पर 
कितना मुश्किल है 
अपने अंतर्द्वंद से लड़ना ..!

33 टिप्‍पणियां:

  1. kitna mushkil hai apne antardwand se ladna...sach kaha hai.bahut sundar ehsaas.happy new year.

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  2. भीतर उठा गुबार
    थम चुका अब
    जीत चुकी मैं
    पर
    कितना मुश्किल है
    अपने अंतर्द्वंद से लड़ना ..!

    बिल्कुल सही कहा…………भावनाओ का सुन्दर चित्रण्।

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  3. कितना मुश्किल है
    फिर से ख्वाब सजाना..

    Bahut sundar...

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  4. कितना मुश्किल है
    अपने अंतर्द्वंद से लड़ना ..!बिल्कुल... बहुत मुश्किल है

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  5. अंतर्द्वंद्व से लड़ना हमेशा ही मुश्किल होता है ... सुन्दर प्रस्तुति

    नव वर्ष की शुभकामनायें

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  6. कितना मुश्किल है
    अपने अंतर्द्वंद से लड़ना ..

    बिलकुल सही कहा।

    आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ।


    सादर

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  7. बहुत मुश्किल है अंतर्द्वंद से लड़ना
    नव वर्ष पर सार्थक रचना
    आप को भी सपरिवार नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !

    शुभकामनओं के साथ
    संजय भास्कर

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  8. उद्वेलित करती एक दिलकश कविता. ..... आभार !!

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  9. आशा जी कमाल लिखती हैं आप
    सुंदर रचना !

    आभार !
    नए साल की हार्दिक बधाई आपको !

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  10. सुंदर रचना।
    गहरी अभिव्‍यक्ति।

    नव वर्ष की शुभकामनाएं.....

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  11. कितना मुश्किल है
    अपने अंतर्द्वंद से लड़ना ..!
    ..सच अंतर्द्वंद से लड़ना आसां नहीं..
    मनोभावों का सुन्दर चित्रण..
    आपको एवं आपके परिवार को नए वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !

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  12. बहुत ही भावमय करते शब्‍दों का संगम
    कल 04/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्‍वागत है, 2011 बीता नहीं है ... !

    धन्यवाद!

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  13. मनोभावों का सुन्दर चित्रण|धन्यवाद|

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  14. मन के भावों का सुंदर चित्रण ...

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  15. सबसे मुश्किल होता है खुद से लड़ना

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  16. अंतद्वंद से लडना बड़ा मुश्किल कार्य,...सुंदर चित्रण
    "काव्यान्जलि":

    नही सुरक्षित है अस्मत, घरके अंदर हो या बाहर
    अब फ़रियाद करे किससे,अपनों को भक्षक पाकर,

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  17. पर वाकई मुशील है .. नव वर्ष की शुभकामनायें

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  18. प्रस्तुति अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट " जाके परदेशवा में भुलाई गईल राजा जी" पर आपके प्रतिक्रियाओं की आतुरता से प्रतीक्षा रहेगी । नव-वर्ष की मंगलमय एवं अशेष शुभकामनाओं के साथ ।

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  19. दुब्या से लड़ना आसान है खुद से बहुत मुश्किल ... अंतर्द्वंद को बाखूबी लिखा है ...

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  20. कितना मुश्किल है
    अपने अंतर्द्वंद से लड़ना ..!

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति...

    ब्लॉग से जुड़ने के लिए शुक्रिया|
    स्नेह बनाए रखिएगा, आभार!

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  21. पर
    कितना मुश्किल है
    फिर से ख्वाब सजाना..

    behatareen abhivyakti ...badhai.

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  22. बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति.
    अंतर मन के द्वंद्व का दृष्टा ही विजेता होता है.
    शुभ कामनाएं.

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  23. बहुत सुन्दर रचना...
    खुद से खुद की लड़ाई....
    सचमुच जटिल है..

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  24. बहुत सुंदर रचना
    सभी मित्रो को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें
    http://garhwalikavita.blogspot.com/

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  25. वाकई अंतर्द्वंद से लड़ना सहज नहीं.

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  26. "कुछ अनकही सुनूँ
    कह डालूं सब कुछ
    बिखेर दूं
    लम्हा-लम्हा"
    पर
    कितना मुश्किल है
    फिर से ख्वाब सजाना..

    सच..... भावपूर्ण अभिव्यक्ति

    vikram7: हाय, टिप्पणी व्यथा बन गई ....

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  27. मुश्किल है ख्वाब सजाना..बहुत सुंदर रचना

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